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आपातकाल में संघर्ष करत-करत शरीर त्याग करे वाला दधीचियन के श्रद्धांजलि देत प्लेटलेट दान कइल गइल

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जमशेदपुर : 25 जून 1975 के लगावल गइल आपातकाल के लोग आजुओ काला दिवस के रूप में याद करेला। आपातकाल के दौरान आनंद मार्ग पर भइल अत्याचार के विरोध में जे-जे लोग दधीचि बनलें, ओह अमर आत्मन के श्रद्धांजलि अर्पित करत कैंसर पीड़ित मरीज खातिर सुनील आनंद सिंगल डोनर प्लेटलेट दान कइलन।
सुनील आनंद कहलन कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी लोकतंत्र पर काला धब्बा लगावत पूरा देश में आपातकाल लागू कइली। आपातकाल लागू होखे के बाद नागरिकन के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिहल गइल। 25 जून 1975 के पूरा भारत में इमरजेंसी लागू कर दिहल गइल। आनंद मार्ग से जुड़ल सौ से अधिक संगठनन पर प्रतिबंध लगा दिहल गइल, अनुयायियन के जेल भेजल गइल आ उनकरा पर सबसे अधिक अत्याचार कइल गइल।
आनंद मार्ग के संस्थापक गुरु भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी के चिकित्सा के नाम पर जहर दिहल गइल, बाकिर ऊ बाल-बाल बच गइलें। अपना आराध्य गुरु पर हो रहल अत्याचार के विरोध में आनंदमार्गियन भारते ना, बल्कि विदेशन में भी आत्मदाह कइलन।
दधीचियन के बलिदान :

  1. आ. दिव्यानन्द अवधूत :
    बाबा के जेल में दिहल गइल जहर आ उनकरा पर हो रहल अत्याचार के विरोध में पटना विधानसभा के सामने आत्मदाह कइलन।
  2. आ. दिनेश्वरानन्द अवधूत :
    दिल्ली के पुरान किला में बाबा पर हो रहल अत्याचार के विरोध में आत्मदाह कइलन।
  3. आ. अतुलानन्द अवधूत :
    पटना के बांकीपुर जेल में बाबा पर हो रहल अत्याचार के विरोध में आत्मदाह कइलन।
  4. आ. त्यागीश्वरानन्द अवधूत :
    आपातकाल के दौरान सरकार द्वारा गिरफ्तार कइला के बाद भागलपुर जेल में एतना यातना दिहल गइल कि ओहिजे उनकर मृत्यु हो गइल।
  5. ब्रह्मचारिणी ऊमा आचार्या आ आ. लोकेश ब्रह्मचारी :
    बाबा पर हो रहल अत्याचार के विरोध में बर्लिन (जर्मनी) में आत्मदाह कइलन।
  6. आ. गगन ब्रह्मचारी :
    डलास, टैक्सास (अमेरिका) में बाबा पर हो रहल अत्याचार के विरोध में आत्मदाह कइलन।
  7. ब्रह्मचारिणी असीतिमा आचार्या :
    मनीला के ल्यूनेटा पार्क में बाबा पर हो रहल अत्याचार के विरोध में आत्मदाह कइली।
  8. ब्रह्मचारिणी शांति :
    जिनेवा में बाबा पर हो रहल अत्याचार के विरोध में आत्मदाह कइली।
    वरिष्ठ पत्रकार कूमी कपूर अपना पुस्तक “द इमरजेंसी” में लिखले बाड़ी कि आनंदमार्गियन के गिरफ्तार करे के योजना इमरजेंसी लागू होखे से लगभग छह महीना पहिले से बनावल जा रहल रहल। पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री आ इंदिरा गांधी के सहपाठी सिद्धार्थ शंकर रे, इंदिरा गांधी के पत्र लिखके आनंदमार्गियन के गिरफ्तारी खातिर सूची तैयार करे आ सभे मुख्यमंत्रियन के निर्देश देवे के सुझाव दिहलन।
    कूमी कपूर अपना पुस्तक में सिद्धार्थ शंकर रे द्वारा इंदिरा गांधी के लिखल पत्र प्रकाशित कइले बाड़ी। 8 जनवरी 1975 के लिखल चिट्ठी में आपातकाल लागू करे के पूरा योजना के जिक्र बा। चिट्ठी के अनुसार ई योजना तत्कालीन कानून मंत्री एच. आर. गोखले, कांग्रेस अध्यक्ष देवकांत बरुआ आ बंबई कांग्रेस अध्यक्ष रजनी पटेल के साथ भइल बैठक में तैयार भइल रहे।
    एहसे साफ बुझाला कि इमरजेंसी के बहाना बनाके आनंदमार्गियन के समाप्त करे के साजिश रचल जा रहल रहे। आनंद मार्ग के गुरु श्री श्री आनंदमूर्ति जी के बहुत यातना दिहल गइल आ उनका अनुयायियन के भी तरह-तरह से प्रताड़ित कइल गइल। सिनेमा हॉलन में आनंद मार्ग के खिलाफ सरकारी विज्ञापन देखावल जात रहे, जवन आनंद मार्ग के “बच्चा चोर” आ “मुड़ी कटवा” कहके बदनाम करे के कोशिश करत रहे, ताकि आम जनता में भय आ घृणा के माहौल पैदा हो सके।
    सरकारी नौकरी में कार्यरत लोगन पर आनंद मार्ग छोड़े के दबाव बनावल जात रहे। जे लोग आनंद मार्ग ना छोड़त रहे, उनकरा खिलाफ कानूनी कार्रवाई करे के धमकी दिहल जात रहे।

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