आरा: भारत भूषण तिवारी के विवाद प्रशासन से चलत रहे वही समय 16 जून के भोजपुर पुलिस एगो बयान जारी कइलस। एह बयान में कहल गइल कि, “जब पुलिस टीम संबंधित व्यक्ति (भरत भूषण) के घर पहुँचल, त ई बात सामने आइल कि ऊ मानसिक रूप से अस्वस्थ बा। ओह लोग के तुरंत उचित इलाज खातिर मानसिक आरोग्यशाला भेजे के जरूरी प्रक्रिया शुरू कर दिहल गइल बा। संबंधित व्यक्ति लगे मौजूद हथियार पर नियंत्रण करे आ ओह व्यक्ति के काबू में लेवे के कोशिश कइल जा रहल बा, ताकि कवनो अप्रिय घटना ना होखे।”
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, “भरत लगातार तीन दिन तक पुलिस के चुनौती देत रहलें। ऊ कई बेर फेसबुक लाइव कइलें आ पुलिस पर गोली चलवले। उनकर मांग रहल कि नेता आ अधिकारी लोग जनता से जे वादा करेला, ओहके पूरा करे। ऊ पिछला साल बाढ़ के दौरान भइल कटाव के मुद्दा उठावत रहलें आ एह मामला में सरकार के ओर से कदम ना उठावल जाए से नाराज रहलें। ऊ इलाका में एगो सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काम करत रहलें।”
भरत भूषण तिवारी के सामाजिक छवि अइसन रहल कि पिछला साल जब गंगा नदी के कटाव से पूरा बिलौटी गांव डूबे के कगार पर पहुंच गइल रहल, त ऊ अपना गांव के बचावे खातिर कटाव वाला इलाका में बालू आ अउरी सामग्री डाल के गांव के बचावे के भरपूर कोशिश कइले रहलें। आजुओ ई बात याद करके गांव के लोग भावुक हो जाला। सचमुच ऊ एगो जुझारू आ कर्मठ नवजवान रहलें।
हाल के दिनन में उत्तर प्रदेश में भाजपा विरोधी ताकत ब्राह्मण समाज के एकजुट करे में लागल बा, काहेकि ब्राह्मण मतदाता कहीं ना कहीं एनडीए गठबंधन से नाराज देखात बा। एही बीच बिहार में एगो ब्राह्मण परिवार पर प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भरत भूषण तिवारी के कथित फर्जी एनकाउंटर के मुद्दा सामने आइल, जे पहिले से नाराज ब्राह्मण मतदाता लोग के भावना के अउरी भड़का रहल बा।
भोजपुर जिला के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी के मौत के मामला हर दिन नया मोड़ ले रहल बा। पुलिस जवन घटना के अपना कार्रवाई बता रहल बिया, ओही मामला में अब अइसन तथ्य सामने आ रहल बा जे कई गो गंभीर सवाल खड़ा करत बा। एह मामला पर पुलिस आ सरकार दुनो चारों ओर से घिरत नजर आ रहल बा।
आरा सदर अस्पताल के सर्जन डॉ. एम. एच. अंसारी के बयान भी सामने आइल बा। डॉक्टर के अनुसार, गोली लागे के बाद भरत तिवारी के इलाज खातिर अस्पताल लावल गइल रहल आ जांच में उनका शरीर में चार से पांच गोली लागल होखे के पुष्टि भइल। डॉक्टर के ई बयान सामने आवते पूरा मामला पर बहस तेज हो गइल बा।
मानवाधिकार आ हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट में काम करे वाला स्वतंत्र विधिक विशेषज्ञ लोग के मानल बा कि अगर कवनो आदमी के आत्मसमर्पण के मौका दिहल बिना आ कानूनी प्रक्रिया के पालन कइले बिना मारल गइल होखे, त जांच के बाद मामला हत्या के श्रेणी में आ सकेला। अइसन स्थिति में दोष सिद्ध होखे पर संबंधित पुलिस अधिकारी लोग के भी कड़ा सजा मिल सकेला।
भारत में कथित फर्जी एनकाउंटर के मामिला में अदालत पहिले भी कई ऐतिहासिक फैसला सुना चुकल बा। मुंबई पुलिस के चर्चित एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा के लखन भैया फर्जी एनकाउंटर मामला में उम्रकैद के सजा मिल चुकल बा। पंजाब के तरनतारन फर्जी एनकाउंटर मामला में सीबीआई अदालत पूर्व एसएसपी आ डीएसपी समेत कई पुलिस अधिकारी लोग के उम्रकैद के सजा सुनवले रहे। उत्तर प्रदेश के एटा मामला में भी दोषी पुलिसकर्मी लोग के आजीवन कारावास के सजा मिलल रहे।
हाल के दिनन में तमिलनाडु के मदुरई में हिरासत के दौरान भइल मौत के मामला में भी अदालत पुलिसकर्मी लोग के खिलाफ कड़ा रुख अपनवले बा। एहसे साफ बा कि वर्दी कानून से ऊपर ना ह, आ अदालत सबूत के आधार पर फैसला सुनावेला।
भरत भूषण तिवारी के शरीर में चार-पांच गोली मिले के बात सामने आवे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल ई बा कि आखिर ऊ रात का भइल रहल? का पुलिस के लगे अइसन कवन मजबूरी रहल कि एतना गोली चलावे के पड़ल? का भरत तिवारी के आत्मसमर्पण करे के मौका मिलल रहल? का एह मामला के जांच कवनो स्वतंत्र एजेंसी से करावल जाई? आ सबसे बड़ा सवाल—का ई मुठभेड़ रहल कि हत्या?
आज भोजपुर से लेके पटना तक लोग जवाब मांग रहल बा। काहेकि अपराधी के खिलाफ कार्रवाई करे के अधिकार पुलिस के जरूर बा, बाकिर सजा देवे के अधिकार अदालत के होला। कानून के किताब में गोली ना, बल्कि न्याय के सबसे बड़ा हथियार मानल गइल बा।
भरत भूषण तिवारी के मौत से बिहार के राजनीति में मचलल भूचाल





