जमशेदपुर : 25 जून 1975 के लगावल गइल आपातकाल के आनंद मार्ग के अनुयायी आजुओ “काला दिवस” के रूप में याद करेलें। आनंद मार्ग प्रचारक संघ के सुनील आनंद बतवले कि आपातकाल के दौरान आनंद मार्ग आ ओकर अनुयायियन पर भारी अत्याचार कइल गइल। हजारन साधक-साधिका के गिरफ्तार कइल गइल, संगठनन पर प्रतिबंध लगावल गइल आ मौलिक अधिकारन के निलंबित कर दिहल गइल।
सुनील आनंद के अनुसार, आनंद मार्ग के संस्थापक भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी के बांकीपुर जेल में चिकित्सकीय इलाज के नाम पर जहर देवे के कोशिश कइल गइल। एह घटना आ अनुयायियन पर हो रहल अत्याचार के विरोध में भारत समेत कई देसन में आनंदमार्गियन आंदोलन चलवले आ कई साधु-संन्यासी आत्मदाह क के विरोध दर्ज करवले।
पटना विधानसभा के सामने आ. दिव्यानन्द अवधूत, दिल्ली में आ. दिनेश्वरानन्द अवधूत, पटना में आ. अतुलानन्द अवधूत आत्मदाह कइले। जर्मनी के बर्लिन में ब्रह्मचारिणी ऊमा आचार्या आ आ. लोकेश ब्रह्मचारी, अमेरिका के डलास (टैक्सास) में आ. गगन ब्रह्मचारी, मनीला में ब्रह्मचारिणी असीतिमा आचार्या आ जिनेवा में ब्रह्मचारिणी शांति आत्मदाह क के विरोध जतवली। भागलपुर जेल में यातना सहत आ. त्यागीश्वरानन्द अवधूत के मृत्यु हो गइल।
सुनील आनंद कहलन कि वरिष्ठ पत्रकार कूमी कपूर आपन पुस्तक “द इमरजेंसी” में लिखले बाड़ी कि आनंदमार्गियन के गिरफ्तारी के योजना आपातकाल लागू होखे से कई महीना पहिले से बनावल जा रहल रहल। पुस्तक में प्रकाशित दस्तावेजन के हवाला देत ऊ कहलन कि तत्कालीन पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे, प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पत्र लिखके आनंदमार्गियन के खिलाफ कार्रवाई के सुझाव दिहले रहलन।
ओह दौर में आनंद मार्ग के बदनाम करे खातिर सिनेमा घरन में नकारात्मक प्रचारो चलावल जात रहल। सरकारी नौकरी में कार्यरत लोगन पर संगठन छोड़े के दबाव बनावल गइल।
जमशेदपुर निवासी स्वर्गीय ठाकुर जी सिंह के परिवार भी आपातकाल के पीड़ा झेले वाला परिवारन में शामिल रहल। उनकर पत्नी स्वर्गीय उर्मिला देवी के अनुसार, पति जेल भेज दिहल गइलन आ आनंद नगर में पढ़े वाला बेटा के भी अशांत माहौल के चलते घर लौटे के पड़ल।
सुनील आनंद कहलन कि आपातकाल के दौरान आनंद मार्ग पर भइल अत्याचार के विरोध में संघर्ष करत अपना प्राण न्योछावर करे वाला सभे साधक-साधिका त्याग, बलिदान आ आदर्श के प्रतीक रहलें। एह कारण 25 जून के आनंद मार्ग के अनुयायी काला दिवस के रूप में मनावत लोकतंत्र पर लागल एह काला अध्याय के याद करेलें।
आपातकाल में आनंद मार्ग पर भइल अत्याचार के विरोध में देस-विदेस में आनंदमार्गियन के आत्मदाह





