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एक देश, एक चुनाव से प्रशासनिक खर्चा घटी, करोड़ों मानव-दिवस के बचत होई

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दिल्ली: ‘एक देश, एक चुनाव’ (वन नेशन, वन इलेक्शन) के लागू करे से प्रशासनिक खर्चा में भारी कमी आ सकेला। प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के हालिया अध्ययन के अनुसार, एक साथ चुनाव करावे से पांच साल के चुनावी चक्र में मतदानकर्मी के तैनाती में लगभग 28 प्रतिशत तक कमी आ सकेला। ई करीब 26 लाख कर्मियन के बराबर बा। समय के हिसाब से देखल जाए त प्रशिक्षण आ तैनाती के मिलाके लगभग 1.04 करोड़ मानव-दिवस के बचत हो सकेला।
भारत के चुनाव दुनिया के सबसे बड़ लोकतांत्रिक प्रक्रिया मानल जाला। बाकिर एह विशाल आयोजन के पीछे लाखों कर्मचारी, भारी संसाधन आ प्रशासनिक व्यवस्था के लगातार जुटावल पड़ेला। लोकसभा आ विधानसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होखे से चुनावी गतिविधि लगभग साल भर चलत रहेला, जवना से शासन-प्रशासन पर अतिरिक्त बोझ पड़ेला।
अध्ययन में बतावल गइल बा कि चुनाव ड्यूटी में सबसे अधिक संख्या स्कूल शिक्षकन के होला आ बहुत मतदान केंद्र स्कूल-कॉलेज में बनावल जालें। एह कारणे पढ़ाई-लिखाई बाधित हो जाला, शैक्षणिक कार्यक्रम प्रभावित हो जालें आ विद्यार्थी के पढ़ाई पर असर पड़ेला। अगर चुनाव एक साथ होखे लागी त शिक्षकन आ स्कूल के बार-बार चुनावी काम में लगावल कम हो जाई, जवना से शिक्षा व्यवस्था के फायदा मिली।
वर्तमान व्यवस्था में लोकसभा आ विधानसभा चुनाव अलग-अलग करावे खातिर अलग-अलग मतदान टीम बनावे के पड़ेला। उदाहरण खातिर, अगर कवनो मतदान केंद्र पर लोकसभा आ विधानसभा चुनाव अलग-अलग समय पर होखे त कुल नौ कर्मचारी के जरूरत पड़ सकेला। जबकि एक साथ चुनाव करावे पर ओही काम खातिर मात्र छह कर्मचारी पर्याप्त हो सकत बाड़ें।
ईएसी-पीएम के अध्ययन ऐतिहासिक आंकड़ा के आधार पर तैयार कइल गइल बा। एह में राज्य विधानसभन के समय से पहिले भंग होखे आ कुछ राज्यन में पहिले से एक साथ चुनाव होखे जइसन तथ्यन के ध्यान में रखल गइल बा। एह कारण शुरुआती 33 प्रतिशत बचत के अनुमान घटके 28 प्रतिशत पर आ गइल, जवना से अध्ययन के विश्वसनीयता बढ़ जाला।
हालांकि, अध्ययन एह बात के भी स्वीकार करेला कि एह में सुरक्षा बल, ईवीएम प्रबंधन कर्मी आ मतगणना कर्मी जइसन अन्य श्रेणी के कर्मचारियन के शामिल नइखे कइल गइल। एह कारण वास्तविक लाभ एह अनुमान से अउरी अधिक हो सकेला।
‘एक देश, एक चुनाव’ के विरोध करे वाला लोग संघीय व्यवस्था, राजनीतिक जवाबदेही आ क्षेत्रीय मुद्दा पर राष्ट्रीय मुद्दा हावी होखे जइसन चिंता जतावेला। ई चिंता अपना जगह उचित बा, बाकिर प्रशासनिक दक्षता के पहलू के भी नजरअंदाज नइखे कइल जा सकत। बार-बार चुनाव होखे से आदर्श आचार संहिता लागू हो जाला, जवना से सरकारी फैसला आ विकास योजना के क्रियान्वयन प्रभावित होखेला।
विशेषज्ञन के मानना बा कि एक साथ चुनाव करावे से चुनावी खर्चा घटे, प्रशासनिक संसाधन के बेहतर उपयोग होखे आ शासन के कामकाज में रुकावट कम हो सकेला। हालांकि एह व्यवस्था के लागू करे खातिर संवैधानिक संशोधन, राजनीतिक सहमति आ संक्रमण काल के सावधानी से संभाले के जरूरत पड़ी।
ई अध्ययन बतावता कि ‘एक देश, एक चुनाव’ पर बहस खाली राजनीतिक नजरिया से ना, बल्कि प्रशासनिक दक्षता आ जनहित के दृष्टिकोण से भी होखे के चाहीं। अगर लोकतांत्रिक मूल्यमान के सुरक्षित राखत प्रशासनिक सुधार संभव बा, त एह दिशा में गंभीर विचार कइल जा सकेला।

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